भटके बच्चे को मिलाया उसके परिवार से, गढ़वा पुलिस की मानवता भरी पहल बनी मिसाल | The Palamu Guru
बच्चा भटका, पर उम्मीद नहीं टूटी — गढ़वा पुलिस बनी संकट की साथी |
भंडरिया, गढ़वा : गढ़वा जिला में पुलिस ने एक बार फिर मानवता की बेहतरीन मिसाल पेश की है। इस बार यह मिसाल पेश की भंडरिया थाना की टीम ने, जब बिहार से भटककर पहुंचे एक 11 वर्षीय मासूम बच्चे को न सिर्फ सुरक्षा दी, बल्कि उसे सकुशल उसके परिजनों से मिलवाकर एक परिवार में फिर से मुस्कान लौटा दी।
घटना कुछ यूं है कि बीते दिन एक नाबालिग बच्चा भटकते-भटकते झारखंड के गढ़वा जिले के भंडरिया थाना क्षेत्र में आ पहुंचा। वह घबराया हुआ था और रास्ता भटक चुका था। स्थानीय लोगों की नजर जब इस मासूम पर पड़ी, तो उन्होंने तत्काल इसकी सूचना भंडरिया थाना को दी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अभिजीत गौतम मिश्रा ने अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बच्चे को थाना ले आए।
थाना परिसर में बच्चे की हर संभव तरीके से देखभाल की गई। उसके भोजन, विश्राम और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की गई। बच्चे के हावभाव और बातचीत से साफ था कि वह अपने परिजनों से बिछुड़ गया है और बेहद डरा हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने बड़े ही धैर्य और सहानुभूति के साथ बच्चे से बातचीत की, ताकि उससे कोई उपयोगी जानकारी प्राप्त की जा सके।
पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों से बच्चे ने धीरे-धीरे अपना नाम और अपने परिजनों की जानकारी देना शुरू किया। उसने बताया कि वह बिहार राज्य के भोजपुर जिले के पंडुरा पामपुर गांव का निवासी है और उसके पिता का नाम मुटी राम है। यह जानकारी मिलते ही भंडरिया थाना ने तत्काल भोजपुर जिले के संबंधित थाना—भोजपुर थाना से संपर्क स्थापित किया।
भोजपुर थाना पुलिस को बच्चे के बारे में सूचना देने के बाद परिजनों को भी खबर दी गई। परिजन जब यह खबर सुने तो उनकी आंखें भर आईं। बच्चे के पिता मुटी राम तुरंत गढ़वा के लिए रवाना हुए। जब वे भंडरिया थाना पहुंचे और अपने बेटे को सकुशल देखकर गले से लगाया, तो वह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया।
थाना परिसर में जैसे ही पिता-पुत्र की मुलाकात हुई, वैसे ही एक भावनात्मक दृश्य उत्पन्न हो गया। पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के चेहरे पर भी संतोष और मुस्कान थी कि उन्होंने एक परिवार को फिर से एक किया है।
पिता मुटी राम ने भंडरिया पुलिस की इस संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही के लिए दिल से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि भटकते हुए बेटे को सुरक्षित रखने, उसकी देखभाल करने और वापस लाने में जो मानवीय पहल पुलिस ने दिखाई है, वह आज के समय में दुर्लभ है। उन्होंने भंडरिया पुलिस का आभार जताते हुए कहा कि आज पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था की रखवाली नहीं, बल्कि समाज सेवा का भी बड़ा कार्य कर रही है।
इस पूरी घटना में न केवल एक मासूम बच्चे की जिंदगी को दिशा मिली, बल्कि एक परिवार में फिर से उम्मीद और खुशी लौट आई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भी भंडरिया थाना के कार्य की प्रशंसा की और कहा कि पुलिस अगर इसी तरह जनता से जुड़कर काम करे, तो समाज में बदलाव निश्चित है।
यह घटना समाज के लिए एक संदेश है—संवेदनशीलता और तत्परता से हम एक बड़ी समस्या को हल कर सकते हैं। गढ़वा जिले की यह सकारात्मक कहानी इस बात का प्रमाण है कि पुलिस सिर्फ डंडे की भाषा नहीं बोलती, बल्कि जब बात मानवता की आती है, तो वह सबसे आगे होती है।
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