भाषा पर वार, नहीं होगा स्वीकार – पलामू बोले अब होगा प्रहार | The Palamu Guru

भाषा विवाद में गरमाया पलामू, युवाओं ने कहा–पलामू की भाषा को मान्यता दो, सिर्फ खनिज मत लूटो |

Reported By : The Palamu Guru 
पलामू, मेदिनीनगर | हमारी बोली हमारी पहचान है, भाषा हमारी माँ है साहेब... इसे मत छीनिए ! – इन शब्दों के साथ झारखंड सरकार की भाषा नीति के खिलाफ पलामू की धरती से एक बार फिर बुलंद आवाज उठी। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की नई नियमावली में पलामू और गढ़वा ज़िले के लिए ‘नागपुरी’ को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल करने पर विरोध तेज हो गया है।

इस फैसले के खिलाफ आज पलामू के युवा नेता आशीष भारद्वाज के नेतृत्व में सैकड़ों JTET अभ्यर्थियों और युवाओं ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (D.E.O.) पलामू से मुलाकात कर स्पष्ट रूप से मांग रखी कि परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा के तौर पर मगही को शामिल किया जाए और पलमुआ डायलेक्ट को अधिसूचित कर भाषा का दर्जा दिया जाए।
ज्ञात हो कि झारखंड सरकार ने हाल में सभी जिलों के D.E.O. से सुझाव मांगे हैं कि JTET परीक्षा में किस क्षेत्र की किस भाषा को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल किया जाए। लेकिन प्रस्तावित सूची में पलामू और गढ़वा जैसे मगही-भाषी क्षेत्र में नागपुरी को शामिल किया गया, जिससे लोगों में रोष फैल गया है।

वार्ता के दौरान आशीष भारद्वाज ने D.E.O. को बताया कि पलामू और गढ़वा में करीब 25 लाख लोग पलमुआ बोली बोलते हैं और पूरे राज्य में यह आंकड़ा 75 लाख के पार है। इसके बावजूद इस बोली को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने ज़िला शिक्षा पदाधिकारी को मगही, भोजपुरी और पलमुआ बोली में अंतर स्पष्ट कराते हुए बताया कि यह सिर्फ भाषा नहीं, एक पूरी सांस्कृतिक विरासत है।

D.E.O. पलामू ने प्रतिनिधिमंडल से विस्तारपूर्वक एक घंटे से अधिक बातचीत की, हर पहलू को समझा और आश्वस्त किया कि सुझाव पत्र में स्थानीय भावनाओं और युवाओं की मांग को प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा। उन्होंने युवाओं से लिखित सुझाव भी मांगे और कहा कि उनकी बात को गंभीरता से सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

मीडिया से बात करते हुए आशीष भारद्वाज ने कहा |

ये सरकार बार-बार भाषा के नाम पर पलामू-गढ़वा वासियों को अपमानित कर रही है। जब भी हक़ देने की बात होती है, मुख्यमंत्री जी कोई न कोई षड्यंत्र रचते हैं। कभी भाषा के नाम पर, तो कभी नियोजन के नाम पर। क्या मुख्यमंत्री को ये नहीं पता कि राज्य के किस हिस्से में कौन सी भाषा बोली जाती है?

उन्होंने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा  इनको बस पलामू के गिट्टी, बालू और खनिज का पैसा चाहिए, लेकिन जब अधिकार देने की बारी आती है तो सौतेला व्यवहार शुरू हो जाता है। अब ये नहीं चलेगा।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सिर्फ विरोध नहीं, एक स्वाभिमान की लड़ाई है जिसे हर स्तर पर लड़ा जाएगा।

हमारे लिए भाषा, जमीन, संस्कृति और पहचान सबकुछ है। पलामू क्रांति की धरती है और हम अपने हक के लिए लड़ना जानते हैं। सरकार को चेतावनी है, अब पलामू की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं ने एकजुटता दिखाई। प्रतिनिधिमंडल में रवि शर्मा, नवीन तिवारी, शैलेश तिवारी, मधुकर शुक्ला, अजीत पाठक, चंदा झा, संदीप प्रसाद, दीपक प्रसाद, चंद्रकांत सिंह, मुकेश सिंह, शिवनारायण साव, प्रभात सिंह, गोलू मेहता, संजीत पांडेय, प्रकाश विश्वकर्मा, दिलीप गिरी, अंकित उपाध्याय, राज पांडेय, सुजीत गुप्ता, प्रभात मिश्रा सहित सैकड़ों अभ्यर्थी और युवजन मौजूद थे।

पलामू के युवाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी "माई बोली" को कोई नहीं छीन सकता। यह सिर्फ भाषा नहीं, अस्मिता और अधिकार की लड़ाई है। और इस बार यह लड़ाई रुकेगी नहीं, सरकार को झुकना होगा – पलामू अब चुप नहीं बैठेगा।

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