पलामू में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल ? बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे दर्जनों स्कूल, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ !
पलामू में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल ? बिना NOC के चल रहे दर्जनों स्कूल, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ !

Reported By : The Palamu Guru
पलामू जिले में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। एक तरफ राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बच्चों के बेहतर भविष्य की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जिले में शिक्षा विभाग के नियमों को ताक पर रखकर दर्जनों निजी स्कूल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन स्कूलों के पास अनिवार्य NOC (No Objection Certificate) तक नहीं है।
शिक्षा विभाग की लापरवाही और अनदेखी का आलम यह है कि इन स्कूलों पर न तो किसी तरह की जांच की जा रही है और न ही कोई कार्रवाई। न इन स्कूलों की पढ़ाई का स्तर तय है, न ही बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई मानक। ऐसे में जिले के नौनिहालों का भविष्य अधर में लटक गया है ।
अगर सरकारी आंकड़ों की बात की जाए तो पलामू जिले में कुल 18 स्कूल ही विभाग से रजिस्टर्ड हैं। वहीं, जिले में सैकड़ों स्कूल बिना किसी मान्यता और परमिशन के बच्चों का भविष्य संवारने का दावा कर रहे हैं। जिले में चल रहे अवैध स्कूलों की असली तस्वीर तब सामने आई, जब IANS News Agency ने इस पूरे मामले की पड़ताल की ।
IANS ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DSE) से जब इस मामले में बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने टाल-मटोल करते हुए,ऑन कैमरा कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, विभाग द्वारा संचालित और रजिस्टर्ड स्कूलों की संख्या जरूर बताई , जिससे साफ हो गया कि जिले में दर्जनों निजी स्कूल बिना किसी वैधानिक अनुमति के संचालित हो रहे हैं।
इस पूरे मामले पर जब IANS ने पलामू जिला प्रारंभिक शिक्षा समिति सदस्य एवं सांसद प्रतिनिधि विजय कुमार ओझा से प्रतिक्रिया ली तो श्री ओझा ने इस पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि नियम अनुसार विद्यालय संचालित करने के लिए सरकारी प्रावधान है। इसके तहत ही किसी विद्यालय को मान्यता दी जाती है। अगर जिले में बिना रजिस्ट्रेशन के स्कूल संचालित हो रहे हैं, तो उन्हें तत्काल बंद किया जाना चाहिए। ऐसे स्कूल बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं ।
जिले में दर्जनों स्कूल बिना NOC और रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। यह न केवल शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ एक खुला खिलवाड़ है। जिला प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। हमने कई बार इस विषय को उठाया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
वहीं, इस मामले पर स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों में भी शिक्षा विभाग के प्रति जबरदस्त नाराजगी है। अभिभावकों का कहना है कि जिले में सैकड़ों स्कूल बिना मान्यता के धड़ल्ले से चल रहे हैं, लेकिन देखने और रोकने वाला कोई नहीं है । अभिभावकों ने कहा कि हम लोग बच्चों को अच्छी पढ़ाई के लिए स्कूल भेजते हैं। हर महीने मोटी फीस भरते हैं, लेकिन जब स्कूल का कोई रजिस्ट्रेशन ही नहीं है, तो हमारे बच्चों का भविष्य कौन संभालेगा? अगर कोई हादसा या अनहोनी हो जाए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? शिक्षा विभाग की अनदेखी का ही नतीजा है कि जिले में न कोई पढ़ाई का स्तर तय है और न ही स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई मानक बनाए गए हैं। कई स्कूल बिना मान्यता के संचालित हैं, जहां पढ़ाई-लिखाई का कोई ढांचा नहीं है। जब तक जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ऐसे अवैध स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक जिले में शिक्षा का स्तर सुधरने वाला नहीं है। साथ ही बच्चों के भविष्य के साथ यूं ही खिलवाड़ होता रहेगा। प्रशासन को ऐसे स्कूलों की सूची बनाकर उन्हें बंद कराना चाहिए और दोषियों को सख्त सजा देनी चाहिए।
अब सवाल ये उठता है कि आखिर कब तक पलामू में शिक्षा व्यवस्था ऐसे ही सवालों के घेरे में रहेगी? कब तक अवैध स्कूलों पर कार्रवाई नहीं होगी? और कब तक नौनिहालों के भविष्य के साथ यूं ही खिलवाड़ होता रहेगा? जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस पूरे मामले में संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आए और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
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