थाना प्रभारी निलंबित | मुकदमों से जुड़े ई-साक्ष्य अपलोड न करने में बरती लापरवाही |
थाना प्रभारी निलंबित: मुकदमों से जुड़े ई-साक्ष्य अपलोड न करने में बरती लापरवाही ।
Reported By : The Palamu Guru
मेदिनीनगर (पलामू) – पलामू जिले के सतबरवा थाना प्रभारी अंचित कुमार को गंभीर लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। पलामू रेंज के डीआईजी वाईएस रमेश ने यह कार्रवाई की है। थाना प्रभारी पर मुकदमों से संबंधित ई-साक्ष्य (डिजिटल सबूत) को समय पर अपलोड न करने का आरोप लगा है। यह निर्णय डीआईजी द्वारा किए गए नियमित निरीक्षण के दौरान लापरवाही सामने आने के बाद लिया गया।
जांच के दौरान खुलासा
डीआईजी वाईएस रमेश ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पलामू, लातेहार और गढ़वा जिले के पुलिस थानों में दर्ज मामलों से जुड़े ई-साक्ष्य की समीक्षा की थी। इस दौरान यह सामने आया कि पलामू में 11 मामलों से संबंधित ई-साक्ष्य अब तक अपलोड नहीं किए गए थे। वहीं, लातेहार में 28 और गढ़वा में 7 मामलों से जुड़े डिजिटल सबूत पहले ही अपलोड किए जा चुके थे।
डीआईजी के अनुसार, ई-साक्ष्य अपलोड करने की प्रक्रिया में सतबरवा थाना की लापरवाही स्पष्ट रूप से दिखाई दी। इसके बाद थाना प्रभारी अंचित कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश
डीआईजी वाईएस रमेश ने पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले के सभी पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मुकदमों से जुड़े ई-साक्ष्य समय पर अपलोड किए जाएं। उन्होंने कहा कि ई-साक्ष्य की समीक्षा हर महीने दो बार की जाती है, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही को समय रहते पकड़ा जा सके।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं
डीआईजी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि ई-साक्ष्य अपलोड करने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह प्रक्रिया न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है, जिससे मामलों की जांच और न्यायिक कार्यवाही में पारदर्शिता बनी रहती है।
इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि पुलिस महकमे में अनुशासन और जिम्मेदारी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मामले के बाद पुलिस प्रशासन में भी हलचल मच गई है और अन्य थानों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है ई-साक्ष्य?
ई-साक्ष्य यानी डिजिटल सबूत उन मामलों में शामिल होते हैं, जिनमें घटनास्थल से जुड़े वीडियो, फोटो, दस्तावेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्डिंग को अपलोड किया जाता है। यह प्रक्रिया आधुनिक पुलिसिंग का अहम हिस्सा है, जिससे मामलों की जांच को अधिक सटीक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाता है।
यह निलंबन पुलिस विभाग के अन्य अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से बचा जा सके।
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